हिंदी

मेरे पसंदीदा शेर

हम अपने शह्र में महफ़ूज़ भी हैं ख़ुश भी हैं

ये सच नहीं है, मगर एतबार करना है

मैं सच कूहंगी मगर फिर भी हार जाऊंगी

वो झूट बोलेगा और लाजवाब कर देगा

जो पड़ी दिल पे, सह गये लेकिन

एक नाज़ुक सी बात ने मार डाला

ग़म का तूफ़ाँ भी गुज़र ही जायेगा

मुस्कुरा देने की आदत चाहिए

सबकी नज़रों में हो साक़ी ये ज़रूरी है मगर

सब पे साक़ी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नही

मुझे शरअ़ा से कोई चिढ़ नहीं, पर इस इत्तेफ़ाक़ का क्या करूँ

कि जो वक़्त बादाकशी का है वही वक़्त भी है नमाज़ का

आदम को मत ख़ुदा कहो, आदम ख़ुदा नहीं

लेकिन ख़ुदा के नूर से आदम जुदा नही

दैर काबा से जुदा, काबा कलीसा से जुदा

इन को मैख़ाने के संगम पे मिला दे साक़िया