हिंदी

मेरे पसंदीदा शेर

हमें तो मुद्दतों से है तलाश, इक ऐसे इन्सां की

हमारी ज़िन्दगी को भी जो, अपनी ज़िन्दगी समझे

हिन्दू ही बुरा है, न मुसलमान बुरा है

आ जाए बुराई पे, तो इन्सान बुरा है

बे-ख़बर है, अपनी अज़मत से, नहीं है आश्ना

सर फ़रिश्तों के, झुके हैं, आदमी के सामने

दिल के आईने में है, तस्वीरे-यार

जब ज़रा गर्दन झुकाई, देख ली

और तो आईने में, ऐब नहीं

साफ़ दिल है, यही बुराई है

क्यों जाऊं मैं, सूए-काबा ऐ शेख़

बुतख़ाने में क्या, ख़ुदा नहीं है

दिल में अपने जिसे पता न मिला

उसको काबे में भी ख़ुदा न मिला

किस का है जिगर, जिस पे ये, बेदाद करोगे

लो दिल तुम्हें हम देते हैं, क्या याद करोगे